उत्तराखंड के विकास की संभावनाएं

 युवा उत्तराखंड और इसका भविष्य -


आज उत्तराखंड 22 वर्ष का हो चुका है । इस उम्र में एक युवक अपने भविष्य को संवारने की जद्दोजहद में जुटा रहता है तथा उसके अभिभावक भी अपने बच्चे के भविष्य के लिए चिंतित होने लगते हैं और अपने स्तर से उसे अपना हर संभव सहयोग प्रदान करते हैं। आज उत्तराखंड को भी अभिभावक के रूप में जागरूक एवं संघर्षशील नागरिकों की आवश्यकता है। उत्तराखंड में भौतिक एवं मानवीय संसाधनों की कोई कमी नहीं है बस जरूरत है एक ऐसे विकास मॉडल बनाने की जो उत्तराखंड को विकास के पथ पर आगे ले जाने में सहायक हो सके।

उत्तराखंड में प्राकृतिक सौंदर्य की कोई कमी नहीं है यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। सीजन के समय नैनीताल में पर्यटकों की भीड़ इस बात का प्रमाण है। वहां अधिक भीड़ हो जाने के कारण प्रशासन नो एंट्री का बोर्ड लगाकर पर्यटकों को वापस भेज देता है। जरूरत है उन पर्यटक को को बेहतर आवागमन की सुविधा प्रदान कर बिनसर, रानीखेत, कौसानी ,जागेश्वर ,चौकड़ी जैसे अन्य स्थानों की ओर जाने के लिए प्रोत्साहित करने की। लेकिन यह तभी संभव होगा जब आवागमन हेतु सड़क इस स्तर के बने कि लोग कम समय में सुगमता से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।

उदाहरण के लिए हल्द्वानी अल्मोड़ा बागेश्वर मोटर मार्ग को ही लें इस समय हल्द्वानी से बागेश्वर आने में 6 -7 घंटे लग जाते हैं उसमें भी बरसात के सीजन में हमेशा सड़क बाधित ही रहती है जिस कारण नैनीताल से आगे न तो पर्यटक आने का साहस कर पाते हैं और नहीं यहां के स्थानीय समय पर इलाज एवं आगे की यात्रा के लिए ट्रेन को सही समय पर पकड़ पाते हैं। अधिकतर समय लंबे जाम में फंसे रहना लोगों की मजबूरी बन जाती है।

आवागमन की सुविधा सुचारू न होने के कारण ही पलायन भी बढ़ रहा है। यदि सड़कें दुरुस्त होती है तो लोगों को सामान भी सस्ते दामों में मिलता। यहां के उत्पाद को बाहर भेजने में भी सुविधा होती।

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थितियों के अनुसार यहां पर जैविक सब्जी, फल, मोटे अनाज , चाय मछली पालन पशुपालन जैसे व्यवसायों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। खड़िया, लीसा, लकड़ी, जल संसाधन के दोहन के लिए स्थानीय स्तर पर उपक्रम लगाए जाने की आवश्यकता है।

उत्तराखंड के बेहतर भविष्य के लिए आज जरूरत है सभी लोगों को मिलजुल कर आगे बढ़ने की। पीछे क्या खोया क्या पाया, किसने क्या किया क्या नहीं किया,इस पर आरोप-प्रत्यारोप करने एवं निराश या उत्साहित होने के बजाय भविष्य की संभावनाओं को तलाशने की आवश्यकता है। इसके लिए सभी लोगों को जागरूक होकर एक स्वर में आवाज उठानी होगी। सरकारें वोट से बनती हैं

राजनीतिक दल लोगों की नब्ज टटोलकर अपना घोषणा पत्र तैयार करते हैं। हमें अपने छोटे -मोटे एवं अल्पकालिक स्वार्थ को त्याग कर ऐसे मुद्दों को उठाना होगा जो हमारी सुविधाओं एवं बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में मददगार हों।

वर्तमान में हमारे राज्य की वित्तीय स्थिति इस रास्ते में बाधक बन सकती है। अतः हमें प्राथमिकताओं का निर्धारण कर अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचानी होगी। निकट भविष्य में लोकसभा के चुनाव आने वाले हैं। 

यदि हम अभी से अपनी स्थानीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक स्वर में टनकपुर -बागेश्वर रेल मार्ग की स्वीकृति एवं इस हेतु धन का आवंटन की मांग करें तो लोगों के दबाव के चलते हमें सफलता मिल सकती है। वर्तमान में इस पर सर्वेक्षण का कार्य भी प्रगति पर है हमारे सक्रिय होने पर सर्वेक्षण के कार्य में भी तेजी आएगी। और यदि किन्ही तकनीकी खामियों के चलते यह रेल मार्ग बनना संभव नहीं हो पाता है तो दूसरा विकल्प हल्द्वानी - कोसी बागेश्वर मोटर मार्ग की मांग की जा सकती है। इस मार्ग को ऑल वेदर, जोखिम रहित तथा छोटा करने के लिए भुजियाघाट से राती घाट तथा काकडी घाट से कोसी तक 2 सुरंगें तथा जोखिम संभावित स्थानों पर फ्लाईओवर का निर्माण करने की मांग की जा सकती है। यह मार्ग बागेश्वर, अल्मोड़ा, रानीखेत, चौखुटिया के निवासियों के लिए वरदान साबित हो सकता है। बहुत लोगों को यह सुझाव हास्यास्पद या असंभव लगेगा लेकिन लोकतंत्र में जनता एक स्वर में यदि बात करने लगे तो कुछ भी संभव हो सकता है। आज हर रोज समाचारों में हम सुनते रहते हैं कि अमुक जगह लंबी लंबी सुरंगों एवं पथरीली चट्टानों को काटकर सड़कें बनवाने के लिए केंद्र सरकार घोषणाएं भी कर रही है और उनको अमल में भी ला रही है।

आइए एक साथ मिलकर उत्तराखंड के विकास के लिए एक स्वर में आवाज उठाएं। उत्तराखंड के भविष्य में ही हमारा एवं हमारी पीढ़ियों का भविष्य निर्भर होगा।

   --------जय उत्तराखंड जय भारत-------

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