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वंचित; वंचित क्यों

 उत्तराखंड के अंबेडकर मुंशी हरिप्रसाद टम्टा जी को उनके 138वीं जन्मदिन पर नमन।    20वीं शताब्दी के प्रारंभ में दलितों व वंचितों के हितों के लिए संघर्षरत मुंशी हरिप्रसाद टम्टा को उत्तराखंड का अंबेडकर भी कहा जाता था। उस समय छुआछूत तथा दलितों के साथ अत्याचार के खिलाफ उन्होंने संघर्ष किया उसी के परिणाम स्वरूप दलितों के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले अपमानजनक शब्दों के स्थान पर शिल्पकार शब्द प्रयोग में आने लगा। उन्हीं के प्रयासों से वंचितों को सेना में सेवा करने का मौका मिला। वे दलितों और वंचितों के उत्थान के लिए आजीवन संघर्षरत रहे।    आज एक सदी बीत जाने के बाद जब हम तत्कालीन परिस्थितियों के साथ वर्तमान की तुलना करते हैं तो देखते हैं कि ग्रामीण परिवेश में दलितों की सामाजिक स्थिति में संतोषजनक सुधार नहीं हुआ है।   जो लोग पूर्व से सक्षम थे या किसी तरह शिक्षा ग्रहण कर पाए उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार अवश्य हुआ लेकिन सामाजिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया। सामाजिक भेदभाव तो जातियों के अंदर भी बना हुआ है। यदि रोटी - बेटी का संबंध सामान्य वर्ग का दलितों के साथ नही...